मन की बात 2.0: प्रधानमंत्री ने बताई रियल लाइफ की प्रेरक कहानियां 23 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'मन की बात 2.0' ...
मन की बात 2.0: प्रधानमंत्री ने बताई रियल लाइफ की प्रेरक कहानियां
23 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'मन की बात 2.0' की 9 वीं कड़ी में देश में बदलाव व परिवर्तन की कई सकारात्मक कहानियां साझा की। जो न केवल आपको प्रेरित करेंगी बल्कि आपको अपने जीवन को नई दिशा देने में मदद मिलेगी। आइए जानें रियल लाइफ की प्रेरक कहानियां।
बिहार की महिला की प्रेरक कहानी
बिहार की एक प्रेरणादायी कहानी का उल्लेख करते करते हुए पीएम ने बताया कि बिहार का यह इलाका दशकों से बाढ़ की त्रासदी से जूझता रहा है। ऐसे में, यहाँ, खेती और आय के अन्य संसाधनों को जुटाना बहुत मुश्किल रहा है। मगर इन्हीं परिस्थितियों में पूर्णिया की कुछ महिलाओं ने एक अलग रास्ता चुना। पहले इस इलाके की महिलाएं, शहतूत या मलबरी के पेड़ पर रेशम के कीड़ों से कोकून तैयार करती थीं, जिसका उन्हें बहुत मामूली दाम मिलता था। जबकि उसे खरीदने वाले लोग, इन्हीं कोकून से रेशम का धागा बना कर मोटा मुनाफा कमाते थे। लेकिन, आज पूर्णिया की महिलाओं ने एक नई शुरुआत की और पूरी तस्वीर ही बदल कर के रख दी है। इन महिलाओं ने सरकार के सहयोग से उत्पादन सहकारी संघों का निर्माण किया, रेशम के धागे तैयार किये और फिर उन धागों से खुद ही साड़ियाँ बनाना भी शुरू कर दिया और अब सब न केवल आत्मनिर्भर हैं बल्कि बड़ी धनराशि अर्जित कर रही हैं।
काम्या कार्तिकेयन की उपलब्धि की प्रेरणादायी कहानी
प्रधानमंत्री मोदी ने बारह साल की लड़की काम्या कार्तिकेयन की उपलब्धि की प्रेरणादायी कहानी भी साझा की, जिसने सिर्फ बारह साल की उम्र में ही माउंट एकोनकागुआ को फ़तह करने का कारनामा कर दिखाया है। यह चोटी दक्षिण अमेरिका में एंडस पर्वत की सबसे ऊँची चोटी है, जो लगभग 7000 मीटर ऊँची है। पीएम ने बताया कि अब वह ‘मिशन साहस’ नामक एक नए मिशन पर है जिसके तहत वो सभी महाद्वीपों की सबसे ऊँची चोटियों को फ़तह करने में जुटी है।’ प्रधानमंत्री मोदी ने सभी को फिट रहने के प्रति प्रोत्साहन देने में उसके प्रयासों की सराहना की और ‘मिशन साहस’ के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं। साथी प्रधानमंत्री ने बताया कि किस प्रकार भारत का भूगोल हमारे देश में एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए कई अवसर उपलब्ध कराता है। प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे अपनी पसंद की जगह पर जाएं, अपनी रूचि की गतिविधि चुनें और अपने जीवन को एडवेंचर के साथ जरूर जोड़ें।
भागीरथी अम्मा की सफलता की कहानी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात में 105 वर्ष की भागीरथी अम्मा की सफलता की कहानी भी सुनाई, जो केरल के कोल्लम में रहती हैं। बचपन में ही उन्होंने अपनी माँ को खो दिया और छोटी उम्र में शादी के बाद पति को भी खो दिया। लेकिन, भागीरथी अम्मा ने अपना हौसला नहीं खोया, अपना ज़ज्बा नहीं खोया। इतनी उम्र होने के बावजूद भागीरथी अम्मा ने लेवल-4 की परीक्षा दी और बड़ी बेसब्री से परीक्षा परिणाम का इंतजार करने लगी। उन्होंने परीक्षा में 75 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। अम्मा अब और आगे पढ़ना चाहती हैं। ज़ाहिर है, भागीरथी अम्मा जैसे लोग इस देश की ताकत हैं। प्रेरणा की एक बहुत बड़ी स्रोत हैं।
मुरादाबाद के सलमान की बुलंद हौसले की कहानी
पीएम ने बताया कि सलमान मुरादाबाद के हमीरपुर गाँव में रहते हैं और जन्म से ही दिव्यांग हैं। इस कठिनाई के बावजूद भी उन्होंने हार नहीं मानी और खुद ही अपना काम शुरू करने का फैसला किया। साथ ही, ये भी निश्चय किया कि, अब वो अपने जैसे दिव्यांग साथियों की मदद भी करेंगे। फिर क्या था, सलमान ने अपने ही गाँव में चप्पल और डिटरजेंट बनाने का काम शुरू कर दिया। देखते-ही-देखते, उनके साथ 30 दिव्यांग साथी जुड़ गए।
प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के कच्छ इलाके के अजरक गाँव के लोगों द्वारा दिखाई गई ऐसे ही संकल्प की कहानी का भी उल्लेख किया। साल 2001 में आए विनाशकारी भूकंप के बाद सभी लोग गाँव छोड़ रहे थे, तभी, इस्माइल खत्री नाम के शख्स ने गाँव में ही रहकर, ‘अजरक प्रिंट’ की अपनी पारंपरिक कला को सहेजने का फैसला लिया। फिर क्या था, देखते-ही-देखते प्रकृति के रंगों से बनी ‘अजरक कला’ हर किसी को लुभाने लगी और ये पूरा गाँव, हस्तशिल्प की अपनी पारंपरिक विधा से जुड़ गया।




