जानिए क्यों मनाई जाती है विश्व जनसंख्या दिवस, भारत में होगी दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी 11 Jul 2019 19:15:17 credit: Google पिछले 30...
जानिए क्यों मनाई जाती है विश्व जनसंख्या दिवस, भारत में होगी दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी
11 Jul 2019 19:15:17
credit: Googleविश्व जनसंख्या दिवस के लक्ष्य
25 साल पहले 1994 में मिस्त्र के काहिरा में जनसंख्या और विकास पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 179 देशों की सरकार के 20,000 अधिकारियों समेत यूएन की एजेंसी व एनजीओ ने हिस्सा लिया था। इस सम्मेलन में आव्रजन, शिशु मृत्यु दर, परिवार नियोजन, जन्म नियंत्रण और महिलाओं की शिक्षा के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। इस दौरान एक कार्यक्रम की शुरुआत हुई जिसकी देखरेख का जिम्मा संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) को सौपा गया।
इस कार्यक्रम के चार लक्ष्य निर्धारित किए गए थे: शिशु और बाल मृत्यु दर को कम करने के लिए सार्वभौमिक शिक्षा और मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए यौन स्वास्थ्य व प्रजनन सेवाओं का प्रसार।
इस वर्ष का विश्व जनसंख्या दिवस उन्ही लक्ष्यों को हासिल करने के प्रति विश्व के देशों की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। दुनिया के विभिन्न देशों के नेताओं से प्रजनन स्वास्थ्य और लैंगिक समानता के मुद्दों पर विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद की जाती है।
credit: Googleविश्व की जनसंख्या 7.7 अरब से भी अधिक हो गई है। संयुक्त राष्ट्र के एक अनुमान के मुताबिक दुनिया की आबादी 2050 तक 9.8 बिलियन हो जाएगी। आज 1.37 बिलियन लोगों के साथ भारत, दुनिया का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश है। 2019 से 2050 के बीच भारत की आबादी लगभग 27.3 मिलियन बढ़ने की उम्मीद है। इसके साथ ही आबादी के मामले में भारत चीन से आगे निकल जाएगा।
भारत में जनसंख्या विस्फोट के कारण
जन्म दर भारत में जनसंख्या विस्फोट के कारकों में से एक है। भारत में, मृत्यु दर और जन्म दर बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में समान थी। परिणामस्वरूप, धीमी जनसंख्या वृद्धि हुई। हालांकि, धीरे-धीरे, बेहतर स्वास्थ्य सेवा, भोजन की उपलब्धता, आदि के साथ, मृत्यु दर गिरने लगी, लेकिन जन्म दर नहीं गिरा। जन्म दर और मृत्यु दर के बीच के इस अंतर से पिछले कुछ दशकों में जनसंख्या तेजी से बढ़ रहा है।
भारत में, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को वृद्धावस्था में देखभाल करने वाले के तौर पर देखा जाता है। वे यह भी मानते हैं कि अधिक बच्चों का मतलब परिवार में अधिक धन कमाने वाला है।
महिला शिक्षा का प्रजनन क्षमता पर सीधा प्रभाव पड़ता है। अशिक्षा के कारण महिलाओं को परिवार नियोजन और बार-बार होने वाले प्रसव को रोकने की जानकारी नहीं मिल पाती है। जबकि शिक्षित महिलाएँ जानकारी के कारण जल्दी शादी से बचती हैं और कई बच्चे नहीं चुनती हैं।
भारत की दो-तिहाई आबादी 35 वर्ष से कम उम्र के लोगों की है। अभी देश में एक बड़ा कार्यबल मौजूद है जो अधिक उत्पादन कर सकता है। लेकिन इतनी बड़ी श्रम शक्ति के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, पूंजी और प्रौद्योगिकी की पूरी व्यवस्था नहीं है। इससे देश में इन युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों व संभावनाओं का सीमित अवसर है। अधिकांश आबादी बेरोजगार और गरीबी से ग्रस्त है।
भोजन की बढ़ती माँगों को पूरा करने के लिए भले ही नई कृषि तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। जंगलों और चरागाह को भी खेत के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। इसने न केवल भूमि के क्षरण को बढ़ावा मिल रहा है बल्कि भूमिगत जल संसाधनों का भी अत्यधिक दोहन हो रहा है। रसायनों के बढ़ते उपयोग से जल संसाधन प्रबंधन में खामियों के कारण देश में पानी की कमी की समस्या बढ़ रही है।
इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के लोग बेहतर संभावनाओं तलाश में बड़ी तादाद में शहरों की ओर पलायन करते हैं। परिणामस्वरूप, शहरों में बड़ी संख्या में झुग्गी-झोंपड़ी और स्लम इलाके तेजी से बढ़ रहे हैं और शहर पर जनसंख्या का दवाब बढ़ रहा है।
credit: PIBसरकार ने आशा (मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता) द्वारा गर्भ निरोधकों की होम डिलीवरी सुनिश्चित कर रही है। साथ ही वे नवविवाहितों को परिवार नियोजन के बारे में शिक्षित और जागरूक भी बना रही है। महिलाओं की शिक्षा बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं के अभियान की शुरुआत की है जो काफी सराहा जा रहा है। मॉ और बच्चों के पोषण व स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पर सभी प्रयासों के सफल होने के लिए लोगों में जागरूकता व शिक्षा का प्रसार बेहद जरूरी है।