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जैसे-जैसे आयकर रिटर्न आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई करीब आती जा रही है। लोग टैक्स रिटर्न भरने के प्रारूप में बदलाव और स्रोत (टीडीएस) द्वारा जारी किए गए कर में कटौती की दिक्कतों से जुझते नजर आते हैं। वैसे लोग इस बार भी रिटर्न दाखिल करने की तिथि बढ़ाए जाने की उम्मीद कर रहे हैं। क्योंकि आईटीआर की समय सीमा पिछले साल भी बढ़ाई गई थी। पिछले साल आईटीआर फाइल करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त थी।
केंद्रीय बजट FY20 में प्रस्ताव के अनुसार, पैन (स्थायी खाता संख्या) के साथ आधार संख्या को जोड़ना भी आईटीआर दाखिल करने के लिए अनिवार्य कर दिया गया है।
आपके पास आयकर विभाग द्वारा नियुक्त intermediaries जैसे कि ई-फाइलिंग पोर्टल और ऐप, चार्टर्ड अकाउंटेंट, टीआरपी के माध्यम से अपना आईटीआर दाखिल करने का विकल्प है।
यदि आप अपना आयकर रिटर्न (ITR) स्वयं दाखिल कर रहे हैं तो हम आपको बताते हैं कि यह कैसे करना है और अपना आईटीआर फाइल करते समय किस फॉर्म को चुनना है।
रिटर्न फाइल से पहले आपको सभी जानकारी और दस्तावेजों को इकट्ठा करना होगा।
कैसे दर्ज करें?
आपको आयकर विभाग की वेबसाइट Incometaxindiaefiling.gov.in पर इसे ऑनलाइन दर्ज करना होगा। केवल अति वरिष्ठ नागरिकों, जिनकी आयु 80 वर्ष और उससे अधिक है, को मैन्युअल रूप से आईटीआर दाखिल करने की अनुमति है; वे आयकर कार्यालय से संबंधित प्रपत्र प्राप्त कर सकते हैं या इसे विभाग की वेबसाइट से डाउनलोड कर, इसे भर सकते हैं और इसे संबंधित क्षेत्राधिकार वाले आयकर कार्यालय में जमा कर सकते हैं।
आप अपने आईटीआर को आंशिक रूप से या पूरी तरह से ऑनलाइन ई-फाइल कर सकते हैं। आंशिक ई-फाइलिंग के लिए, आपको संबंधित आईटीआर फॉर्म डाउनलोड कर इसे अपने डेस्कटॉप पर सेव करना होगा। इसके बाद इसमें आवश्यक डेटा कर इसे अपने खाते के माध्यम से अपलोड करना होगा और फिर इसे ऑनलाइन जमा करना होगा।
पूरी तरह से ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत, आपको अपने लिए लागू आईटीआर फॉर्म का चयन करना होगा और आवश्यक विवरण ऑनलाइन भरना होगा। एक बार जब आप सारी जानकारी भर लेते हैं, तो फॉर्म को सब्मिट करना होगा।
दोनों ही मामलों में सफल सबमिशन पर आपको एक पावती मिल जाएगी। प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आप या तो रिटर्न को सत्यापित कर सकते हैं या इसकी हस्ताक्षरित प्रति डाक द्वारा विभाग के केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई को भेज सकते हैं। लेकिन इससे पहले कि आप अपना आईटीआर दाखिल करें, पहले कंफर्म हो जाएं कि आपको कौन सा फॉर्म भरना है।
फॉर्म कैसे चुनें?
रिटर्न दाखिल करने के लिए सात आईटीआर फॉर्म उपलब्ध हैं जो केवल चार ही व्यक्तियों पर लागू होते हैं, जिनमें हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) शामिल भी हैं, जो आय के स्रोतों और स्तर पर निर्भर करता हैं। याद रखें कि यदि आप गलत आईटीआर फॉर्म में रिटर्न फाइल करेंगे तो कर विभाग इसे रिजेक्ट कर सकता है। इसलिए ITR फॉर्म चुनते समय बेहद सावधानी बरतें।
अगर किसी व्यक्ति ने गलत आईटीआर फॉर्म दाखिल किया है तो वह आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 139 (5) के तहत रिटर्न को संशोधित कर सकता है।
ITR-1 उन आकलनकर्ताओं के लिए है जिनकी आय का प्राथमिक स्रोत वेतन है। इसका उपयोग तब भी किया जा सकता है जब एक घर की संपत्ति से आय होती है, बशर्ते किसी नुकसान या हानि को आगे न दिखाना हो । लॉटरी, घोड़े की दौड़, या अस्पष्ट आय का स्रोत वाले लोग भी आईटीआर -1 फॉर्म का भी उपयोग कर सकते हैं। हालाँकि, आप ITR-1 का उपयोग केवल तभी कर सकते हैं जब उपरोक्त सभी स्रोतों से आपकी कुल आय। 50 लाख से अधिक न हो।
ITR-2 का उपयोग ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है जिसकी आय किसी व्यवसाय या पेशे से न हों। इसका उपयोग पूंजीगत लाभ से प्राप्त आय, एक से अधिक घर की संपत्ति व अन्य स्रोतों से आय होने पर किया जा सकता है। नए फॉर्म ITR-2 में महत्वपूर्ण बदलाव लाए गए हैं, जिससे करदाताओं के लिए आयकर भरना आसान हो जाएगा।
अब, आपको ITR-2 में कुछ अतिरिक्त खुलासे करने की आवश्यकता है। इनमें आवासीय स्थिति से संबंधित विवरण शामिल हैं जैसे कि भारत में बिताए दिनों की संख्या। अनिवासी भारतीयों को अपने निवास देश वहां की करदाता पहचान संख्या का भी उल्लेख करना आवश्यक है। इसके अलावा, शेल कंपनियों की पहचान करने के लिए ITR-2 में विभिन्न संशोधन किए गए हैं।
ITR-3 का उपयोग व्यक्तिगत व्यवसायी और पेशेवरों द्वारा किया जा सकता है। इस वर्ष, ITR-3 में अतिरिक्त डिस्क्लोजर मानदंड बनाए गए हैं। यह साझेदारी फर्मों के विवरण से संबंधित है जिसमें व्यक्तिगत करदाता उक्त वर्ष के दौरान किसी कंपनी का भागीदार था और किसी अन्य वैधानिक कानून के तहत ऑडिट का विवरण भी देना होगा। इस फॉर्म में जीएसटी रिटर्न के अनुसार बाहरी आपूर्ति के वार्षिक मूल्य का विवरण भी मांगा जाता है।
ITR-4 का उपयोग उन व्यक्तियों और फर्मों द्वारा किया जा सकता है, जो प्रकल्पित कराधान योजना (PTS) के तहत अपना रिटर्न दाखिल करना चाहते हैं और उनकी कुल आय 50 लाख तक है। पीटीएस आपको अनुमानित आय या लाभ पर अपने कर की गणना करने की अनुमति देता है। इस योजना का उपयोग उन व्यवसायों द्वारा किया जा सकता है जिनका कुल कारोबार 2 करोड़ से कम है और वे पेशेवर जिनकी उस वित्तीय वर्ष में सकल प्राप्तियां 50 लाख से कम हैं। जो लोग पीटीएस चुनते हैं, उन्हें खातों की पुस्तकों को बनाए रखने की आवश्यकता नहीं होती है।
कर दाखिल करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए, कर विभाग ने पहले से भरे हुए आईटीआर फॉर्म का नूमना भी दिया है। यदि आप वर्तमान मूल्यांकन वर्ष के लिए पूरी तरह से ऑनलाइन आईटीआर दाखिल कर रहे थे तो विभाग पहले से ही भरे हुए आईटीआर -1 और आईटीआर -4 फॉर्म को देख लें। 11 जुलाई को, विभाग ने ITR-2 और ITR-3 का भरा फॉर्म भी इस सूची में जोड़ दिया है और सभी चार फॉर्म (ITR-1-4) XML फ़ाइल के रूप में डाउनलोड करने के लिए भी उपलब्ध कराए, जो कि आंशिक ई-फाइलिंग के लिए आवश्यक हैं। पहले से भरे हुए फॉर्म में उक्त वर्ष के दौरान मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा भुगतान की गई आय और करों का विवरण होता है।
पहले से भरे हुए फॉर्म का उपयोग करते समय पहले से भरे हुए आंकड़ों की सावधानीपूर्वक जांच करनी चाहिए और जहां कहीं भी आवश्यक हो उन्हें बदल दिया जाना चाहिए।
समय पर आईटीआर फाइल करना आप ही के लिए फायदेमंद है। खास कर ऋण या वीज़ा का आवेदन करते समय आपको आईटीआर के प्रति की जरुरत पड़ेगी।
