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1.37 बिलियन लोगों के साथ भारत, दुनिया का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश है। 2050 तक आबादी के मामले में भारत चीन से आगे निकल जाएगा। इस पर नियंत्रण के उपाय ढूँढ़ने से पहले देश में जनसंख्या विस्फोट के कारण को समझना बेहद जरूरी है।
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भारत में जनसंख्या विस्फोट के कारण
देश की जनसंख्या में सबसे तेज वृद्धि 1951 से 1981 की अवधि के दौरान हुई थी। 1951 में अपने देश की जनसंख्या सिर्फ 36 करोड़ थी और वह 1981 आते-आते 70 करोड़ पर पहुँच गई। 30 वर्षों की इस अवधि के दौरान जनसंख्या में लगभग 34 करोड़ की वृद्धि हो गई, जो जनसंख्या आंकड़ों के इतिहास में सबसे तेज वृद्धि है। अत्याधुनिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं के कारण मृत्यु दर घट कर 15 व्यक्ति प्रति हजार हो गई है जबकि जन्म दर में कोई उल्लेखनीय कमी नहीं आई है। इसीलिए 1951 से 1981 तक के काल को भारत में जनसंख्या विस्फोट की अवधि के रूप में जानी जाती है।
जनसंख्या विस्फोट के कारण
- गर्म जलवायु
भारत में तेजी से बढ़ती जनसंख्या के कारणों में से एक इसकी गर्म जलवायु है। गर्म जलवायु के कारण, लड़कों और लड़कियों में कम उम्र में परिपक्वता आ जाती है।
- बाल विवाह
भारत में बाल विवाह और बहु-विवाह प्रणाली की परंपरा प्रचलित है। देश की लगभग 80% लड़कियों का विवाह उनकी कम उम्र में 15 से 21 वर्ष के बीच किया जाता है। इस प्रकार, लंबे वैवाहिक जीवन का परिणाम अत्यधिक जन्म दर के रूप में मिलता है।
- धार्मिक अंधविश्वास
हिंदू धर्म में पुत्र को महत्ता ज्यादा है। धार्मिक अनुष्ठान और उत्तराधिकारी माना जाता है। इस कारण कई हिंदू परिवारों में पुत्र प्राप्ति हेतु कई प्रयास किए जाते हैं। जबकि इस्लाम में संतान अल्लाह के वरदान (उपहार) माने जाते हैं, परिवार नियोजन के किसी भी माध्यम का उपयोग करके उनके जन्म को रोकना पाप माना जाता है। इन कारणों के कारण, जनसंख्या लगातार बढ़ रही है।
- निरक्षरता और असमानता
भारत में लगभग 20% पुरुष और 36 % महिलाएँ निरक्षर हैं। न तो उन्हें परिवार नियोजन की पूरी जानकारी है और न ही वे अत्यधिक प्रसव के परिणामों के बारे में जानते हैं। यह बढ़ती जनसंख्या के कारणों में से एक है।
- गरीबी
देश के गरीब परिवारों में बच्चों को पैसे कमाने के लिए एक साधन माना जाता है, इसलिए वे हमेशा अपने परिवारों में बच्चों की संख्या बढ़ाने की कोशिश करते हैं। भारत में बच्चों को बुढ़ापे का सहारा माना जाता है। बुढ़ापे के सहारे के लिए एक से अधिक बच्चों को जन्म देते हैं।
- जन्म दर
भारत में शादी के लिए औसत आयु दुनिया के अन्य देशों की तुलना में बहुत कम है। यह भी जनसंख्या विस्फोट का एक कारण है।

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- मृत्यु दर
भारत में वर्ष 1900 से 1910 तक मृत्यु दर 35 से 50 व्यक्ति प्रति हजार थी, जो अब घटकर केवल 7 से 8 व्यक्ति प्रति हजार रह गई है। यह देश में अच्छे और स्वच्छ भोजन, शुद्ध पेयजल, अस्पतालों की सुविधाओं, अच्छी साफ-सफाई, सस्ती दरों पर चिकित्सा सुविधाएं और कुपोषण, निमोनिया, हैजा, महामारी आदि पर नियंत्रण से संभव हुआ है। इसके साथ ही बाल मृत्यु दर में कमी आई है। 1990 में दुनिया के 18% बच्चे भारत में पैदा हुए थे, लेकिन 27% की मौत हो जाती थी। संयुक्त राष्ट्र के एक अध्ययन के मुताबिक पांच साल तक की उम्र के बच्चों की मृत्यु दर घटाने में भारत को बड़ी कामयाबी मिली है. फिलहाल वैश्विक स्तर पर बाल-मृत्यु दर (पांच साल और इससे कम उम्र के बच्चे) का औसत (प्रति हजार जीवित शिशुओं के जन्म पर) 39 है और अब भारत का आंकड़ा घटकर इस वैश्विक औसत के बराबर हो चला है। वहीं लड़के और लड़कियों की मौत का अंतर भी घटा है. पहले 10% ज़्यादा लड़कियां मरती थीं, लेकिन 2017 में लड़कों के मुकाबले सिर्फ़ 2.5% ज़्यादा लड़कियों की मौत हुई।
- परिवार नियोजन के प्रति उदासीन
निरक्षर व्यक्तियों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग परिवार नियोजन के प्रति उदासीन हैं। वे परिवार नियोजन के सरलतम और सस्ते साधनों के उपयोग में भी रुचि नहीं रखते हैं।
- सामाजिक सुरक्षा का अभाव
भारत में सामाजिक सुरक्षा प्रणाली की कमी के कारण, हर माता-पिता चाहते हैं। संकट के समय और उनके बुढ़ापे में, बच्चे के जन्म में आश्रय। यह बेटा होगा या बेटी। बचपन में अपने बच्चे की मृत्यु के भय से, वे बहुत सारे बच्चों को जन्म देते हैं, ताकि उनमें से कोई भी उनके बुढ़ापे का सहारा बने।
उपरोक्त के अलावा, निम्नलिखित जनसंख्या विस्फोट के अन्य कारण हैं
1- विवाह की सामाजिक मजबूरी
2- मनोरंजन के साधनों का अभाव
3- भाग्यवादी दृष्टिकोण
4- बड़े परिवार की महत्वकांक्षा
5- बेहतर आर्थिक स्थिति
6- संयुक्त परिवार प्रणाली, आदि।
जनसंख्या पर नियंत्रण के उपाय
सरकार बढ़ती जनसंख्या पर काबू पाने के कई प्रयास कर रही है। जागरूकता अभियान, परिवार नियोजन व शिक्षा पर जोर देने के बावजूद इसमें यथोचित कामयाबी नहीं मिल रही है। इसके लिए जनमानस की सोच में सुधार आना बेहद जरूरी है।
अगर सोशल मीडिया पर सक्रिय युवाओं की राय देखी जाए तो सभी एकमत हैं कि सरकार को इस हेतु सख्त कानून बनाना चाहिए। कुछ युवा भारत में जनसंख्या काबू करने के लिए चीन जैसी नीति अपनाए जाने पर जोर दे रहे हैं।
देश में विवाह की आयु में वृद्धि करना और कम उम्र पर शादी पर कड़ाई से रोक इस दिशा में अच्छी और कारगार पहल हो सकती है। साथ ही संतानों संख्या 1-2 तक सीमित की जानी चाहिए। यौन शिक्षा के प्रभावशाली प्रसार से भी इसे रोकने में मदद मिलेगी।