विश्व में ‘मिलेट्स’ को लोकप्रिय बनाने का नेतृत्व करेगा भारत पहले दादी या नानी मिलेट्स का गुणगान किया करती थीं, लेकिन फिर मिलेट्स हमारी जिं...
विश्व में ‘मिलेट्स’ को लोकप्रिय बनाने का नेतृत्व करेगा भारत
पहले दादी या नानी मिलेट्स का गुणगान किया करती थीं, लेकिन फिर मिलेट्स हमारी जिंदगी से धीरे-धीरे गायब हो गए। हैरत भरी बात तो ये है कि अब दुनिया हमारी दादी-नानी के राह पर चल पड़ी है। जी हां, कोविड काल में पूरी दुनिया ने मिलेट्स के न्यूट्रिशन से भरपूर खजाने के बारे में जाना और उसे अपनाया। हमने भी मिलेट्स की प्रिवेंटिव हेल्थ केयर की खूबियों को जाना है।
PM मोदी की पहल पर UN का बड़ा फैसला
हकीकत तो यह है कि मिलेट्स कभी हमारे ही खान-पान का हिस्सा हुआ करते थे, लेकिन समय के साथ ये हमारी थालियों से गायब होते चले गए, लेकिन अब एक बार फिर से मिलेट्स को बढ़ावा देने के लिए पीएम मोदी की पहल पर UN ने 2023 को ‘International Year of Millets’ घोषित किया है। भारत इसका नेतृत्व करेगा। केवल इतना ही नहीं इससे देश के किसानों को काफी लाभ मिलने वाला है।
दुनिया ने मोटे अनाजों के महत्व को समझा
एक्सपर्ट का मत है कि दुनिया ने कोविड के दौरान सेहत के लिहाज से मोटे अनाजों के महत्व को समझा है, इसलिए किसानों के लिए इसे उगाना अधिक फायदेमंद समझा जा रहा है। यह अनाज कम पानी और कम उपजाऊ भूमि में भी उग जाता है और दाम भी गेहूं से अधिक प्राप्त होता है।
2018 मोटा अनाज वर्ष
इसके महत्व को ऐसे समझा जा सकता है कि केंद्र सरकार ने कदन्न फसलों के महत्व को समझकर 2018 को यानि मोटा अनाज वर्ष के रूप में मनाया था, ताकि मोटे अनाज के उत्पादन को प्रोत्साहन दिया जा सके। इस पहल को आगे बढ़ाते हुए, भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र आम सभा में 2023 को ‘अंतर्राष्ट्रीय कदन्न दिवस’ के रूप में घोषित करने के प्रस्ताव का नेतृत्व किया था जिसे UN ने स्वीकार कर लिया है।
मिलेट्स को अपनाने का समय
यानि अब समय आ गया है कि मिलेट्स के इस खजाने को फिर से भरा जाए। यानि जिस भोजन को हमने छोड़ दिया था या भुला दिया था उसे हमें फिर से अपनाना होगा। मिलेट्स में जौ, ज्वार, बाजरा, रागी, मड़ुवा, सावां, कोदों, कुटकी, कंगनी, चीना जैसे अनेक अनाजों को हमें फिर से अपनी जिंदगी में खान-पान का हिस्सा बनाना होगा। इस दौरान केंद्र सरकार ने मोटे अनाजों को प्रोत्साहन देने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में पोषक अनाज को शामिल करना और कई राज्यों में कदन्न मिशन की स्थापना करना शामिल है। इसके बावजूद उत्पादन, वितरण और उपभोक्ताओं द्वारा मोटे अनाजों को अपनाने से जुड़ी कई चुनौतियां कायम हैं।
बच्चों और प्रेग्नेंसी में उपयोगी
वहीं वितरण प्रणाली के अंतर्गत, खाद्यान्न वितरण कार्यक्रमों का ध्यान ‘कैलरी सिद्धांत’ से हटाकर ज्यादा विविध खाद्यान्न संकुल प्रदान करने पर लगाया गया है, जिसमें मोटे अनाज को शामिल कर स्कूल जाने की आयु से छोटे बच्चों और प्रजनन-योग्य महिलाओं की पोषण स्थिति में सुधार लाए जाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
’मोटे अनाज’ पर केंद्र सरकार का फोकस
नीति आयोग और विश्व खाद्य कार्यक्रम का इरादा है कि इन चुनौतियों का समाधान व्यवस्थित और कारगर तरीके से किया जाए। इसके लिए नीति आयोग ने संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम के साथ ’20 दिसंबर, 2021′ को एक आशय घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी के तहत मोटे अनाज को मुख्यधारा में लाने पर ध्यान दिया जाएगा और 2023 को अंतरराष्ट्रीय कदन्न वर्ष होने के नाते इस अवसर पर भारत को ज्ञान के आदान-प्रदान के क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व करने में समर्थन दिया जाएगा। इसके अलावा, इस साझेदारी का लक्ष्य है छोटी जोत के किसानों के लिए सतत आजीविका के अवसर बनाना, जलवायु परिवर्तन को देखते हुए क्षमताओं को अपनाना और खाद्य प्रणाली में बदलाव लाना।
किसानों का भी संवरेगा भविष्य
इन तमाम प्रयासों से साफ होता है कि इस दिशा में केंद्र सरकार बढ़ी तीव्रता से कार्य कर रही है और देश के किसान की जिंदगी को खुशहाल बनाने के साथ-साथ देश के भविष्य को सुरक्षित व संरक्षित करने का जिम्मा बखूबी संभाल रही है। बता दें, आशय घोषणापत्र के तहत नीति आयोग और विश्व खाद्य कार्यक्रम के बीच रणनीतिक तथा तकनीकी सहयोग पर ध्यान दिया जाना है, ताकि भारत में उन्नत खाद्य और पोषण सुरक्षा के लिए जलवायु का सामना करने वाली कृषि को मजबूत किया जाए। ऐसे में केंद्र सरकार ने देश के तमाम किसानों से आह्वान किया है कि वे अधिक से अधिक मिलेट्स उगाएं और देश के फूड प्रोसेसिंग उद्योग उनसे आकर्षक प्रोडक्ट तैयार करें। इसकी वैश्विक बाजार में बहुत अधिक डिमांड हैं।
कुपोषण मुक्त होगा भारत
तभी ‘कुपोषण मुक्त भारत’ का निर्माण होगा। हालांकि केंद्र सरकार पहले से ही कुपोषण को दूर करने को लेकर सजग रही है। इसके लिए केंद्र सरकार विभिन्न योजनाएं भी चला रही है। ‘राष्ट्रीय पोषण मिशन’ इनमें से एक है। राष्ट्रीय पोषण मिशन के बारे में :
भारत सरकार द्वारा कुपोषण को दूर करने के लिए जीवन चक्र एप्रोच अपनाकर चरणबद्ध तरीके से पोषण अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत भारत सरकार द्वारा 0 से 06 वर्ष तक के बच्चों एवं गर्भवती एवं धात्री माताओं के स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में समयबद्ध तरीके से सुधार हेतु महत्वाकांक्षी ”राष्ट्रीय पोषण मिशन” का गठन किया गया है राष्ट्रीय पोषण मिशन के अंतर्गत कुपोषण को चरणबद्ध तरीके से दूर करने के लिए लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
उद्देश्य एवं लक्ष्य :
1. 0-6 वर्ष के बच्चों में ठिगनेपन से बचाव एवं इसमें कुल 6 प्रतिशत, प्रति वर्ष 2% की दर से कमी लाना।
2. 0 से 6 वर्ष के बच्चों का अल्प पोषण से बचाव एवं इसमें कुल 6 प्रतिशत, प्रतिवर्ष 2% की दर से कमी लाना।
3. 6 से 59 माह के बच्चों में एनीमिया के प्रसार में कुल 9 प्रतिशत, प्रति वर्ष 3% की दर से कमी लाना।
4. 15 से 49 वर्ष की किशोरियों, गर्भवती एवं धात्री माताओं में एनीमिया के प्रसार में कुल 9 प्रतिशत, प्रति वर्ष 3% की दर से कमी लाना।
5. कम वजन के साथ जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या में कुल 6 प्रतिशत, प्रति वर्ष 2% की दर से कमी लाना।
केंद्र सरकार की प्रमुख पहल
– कोविड-19 के दौरान आर्थिक मदद के हिस्से के रूप में, भारत सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) और आत्मनिर्भर भारत योजना (एएनबीएस) जैसी अतिरिक्त राष्ट्रव्यापी योजनाओं को लागू किया है।
– पीएमजीकेएवाई के तहत, भारत सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (अंत्योदय अन्न योजना और प्राथमिकता वाले परिवारों) के तहत अप्रैल से नवंबर 2020 की अवधि के लिए और फिर मई से नवंबर 2021 की अवधि के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के अंतर्गत शामिल किए गए लोगों सहित 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 80 करोड़ (800 मिलियन) लाभार्थियों के लिए प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम प्रति माह की दर से खाद्यान्न का मुफ्त आवंटन किया है)
– वर्ष 2O2O के दौरान, 3.22 करोड़ (32.2 मिलियन) मीट्रिक टन खाद्यान्न और वर्ष 2021 के दौरान, लगभग 3.28 करोड़ (32.8 मिलियन) मीट्रिक टन खाद्यान्न पीएमजीकेएवाई योजना के तहत लगभग 80 करोड़ (800 मिलियन) एनएफएसए लाभार्थी लोगों को मुफ्त आवंटित किया गया है)
– खाद्यान्न के अलावा, एनएफएसए के तहत 19.4 करोड़ (194 मिलियन) परिवारों को शामिल करने वाले सभी लाभार्थियों को अप्रैल से नवंबर 2020 की अवधि के लिए प्रति माह 1 किलोग्राम प्रति परिवार दाल मुफ्त प्रदान की गई है।
– एएनबीएस के तहत, सरकार ने लगभग 8 लाख (800 हजार) मीट्रिक टन अतिरिक्त मुफ्त खाद्यान्न का आवंटन सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को उन प्रवासियों व फंसे हुए प्रवासियों के लिए किया, जो न तो एनएफएसए और न ही राज्य योजना पीडीएस कार्ड के तहत कवर किए गए थे, ऐसे लोगों को 5 किलो प्रति व्यक्ति प्रतिमाह के हिसाब से दो महीने, मई और जून 2020 की अवधि के लिए मुफ्त खाद्यान्न के अलावा, इस अवधि के लिए एएनबीएस के तहत लगभग 0.27 लाख (27 हजार) मीट्रिक टन साबुत चना आवंटित किया गया था।
– पीएमजीकेएवाई और एएनबीएस के तहत मुफ्त खाद्यान्न, दालें और साबुत चना का आवंटन एनएफएसए के तहत किए गए सामान्य आवंटन के अतिरिक्त था। पीएमजीकेएवाई और एएनबीएस के अलावा, भारत सरकार ने उन सभी लाभार्थियों के लिए ओपन मार्केट सेल स्कीम (घरेलू) के तहत खाद्यान्न आवंटित किया है, जिन्हें राज्य सरकारों द्वारा अपनी योजनाओं के तहत राशन कार्ड जारी किए गए हैं, लेकिन तीन महीने के लिए एनएफएसए के तहत शामिल नहीं किया गया है।
– अप्रैल से जून 2020 तक के महीनों में 21 रुपए प्रति किलोग्राम गेहूं और 22 रुपए प्रति किलोग्राम चावल उपलब्ध कराया गया। खाद्यान्न के आवंटन की कोई अधिकतम सीमा नहीं थी। बाद में इस योजना को मई 2021 से आगे बढ़ा दिया गया।
– 100 से कम श्रमिकों वाले संगठित क्षेत्र के व्यवसायों में प्रति माह 15,000/- रुपए से कम वेतन पाने वालों के रोजगार में व्यवधान के दौरान हुए नुकसान की भरपाई के लिए, सरकार ने उनके मासिक वेतन का 24 प्रतिशत तीन महीने, अप्रैल से जून 2020 के लिए उनके पीएफ खातों में भुगतान किया।
– लगभग 13.62 करोड़ (136.2 मिलियन) परिवारों को लाभान्वित करने के लिए एक श्रमिक को सालाना अतिरिक्त 2,000 रुपए का लाभ प्रदान करने के लिए 1 अप्रैल 2020 से मनरेगा मजदूरी में 20 रुपए की वृद्धि की गई।
– 2020-21 में देय 2,000 रुपए की पहली किस्त का अग्रिम भुगतान किया गया था और अप्रैल 2020 में ही पीएम किसान योजना के अंतर्गत भुगतान किया गया था। इससे 8.7 करोड़ (87 मिलियन) किसानों को लाभ हुआ।
– कुल 20.4 करोड़ (204 मिलियन) प्रधानमंत्री जन धन योजना महिला खाताधारकों को 500 रुपए प्रति माह तीन महीने के लिए, अप्रैल से जून 2020 तक अनुग्रह राशि दी गई।
6.85 करोड़ (68.5 मिलियन) परिवारों का समर्थन करने वाले 63 लाख (6.3 मिलियन) स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के माध्यम से आयोजित महिलाओं के लिए अतिरिक्त मुक्त ऋण देने की सीमा 10 से बढ़ाकर 20 लाख रुपये (1 मिलियन से 2 मिलियन रुपये) कर दी गई।
– सरकार ने अप्रैल से जून 2020 तक 3 करोड़ (30 मिलियन) वृद्ध विधवाओं और दिव्यांग श्रेणी के लोगों को प्रति माह 1,000 रुपये दिए, जिन्हें कोविड-19 के कारण हुए आर्थिक व्यवधान की कठिनाइयों से निपटने के लिए नाज़ुक स्थिति का सामना कर रहे हैं।
– बाल मृत्यु दर पर भारत की स्थिति में 2020 की तुलना में 2021 में सुधार हुआ है। दो सूचकांकों, यानि चाइल्ड वेस्टिंग और चाइल्ड स्टंटिंग, पर 2020 की तुलना में 2021 में स्थिति अपरिवर्तित रही है।


