प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र से लोगों के बचे 13 हजार करोड़ आम नागरिकों को अपना मकान, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों को सस्ते दामों पर उपलब्...
प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र से लोगों के बचे 13 हजार करोड़
आम नागरिकों को अपना मकान, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों को सस्ते दामों पर उपलब्ध कराए जाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से कई कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जो आम नागरिकों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही हैं। इन योजनाओं में से एक है प्रधानमंत्री जन औषधि योजना। देश में गरीबों और मध्यम वर्ग के लोगों को किफायती मूल्य में जेनरिक दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए अबतक 8600 से अधिक जन औषधि केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। इन केंद्रों के माध्यम से बेची गई दवाओं में पिछले साल के मुकाबले 35 फीसदी का इजाफा हुआ है। यही नहीं जेनरिक एलोपैथिक दवाओं के साथ अब आयुर्वेदिक दवाएं भी इसमें शामिल की जा रही हैं। आने वाले दिनों में थर्मामीटर और ब्लड प्रेशर नापने की मशीनें भी इन केंद्रों पर उपलब्ध होंगी।
भविष्य की योजनाओं पर भारतीय जन औषधि परियोजना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवि दधीच ने PM जन औषधि योजना को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारी दी।
प्रश्न- जन औषधि केन्द्र से लोगों को कितना लाभ पहुंच रहा है?
उत्तर – प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना की शुरुआत विशेष रूप से गरीबों और वंचितों के लिए किफायती दरों पर गुणवत्ता वाली दवाइयां उपलब्ध कराने के मकसद से की गई है। साल 2008 में इस योजना की शुरुआत की गई थी। तब से साल 2014 तक देश में सिर्फ 80 केन्द्र थे। पीएम मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने इस संख्या को बढ़ाकर 8,600 से अधिक कर दिया। यहां दवाएं सस्ती होने के साथ-साथ गुणवत्ता में भी अच्छी है। मध्यम वर्ग या गरीब वर्ग में अगर कोई बीमार पड़ जाए, तो इलाज और दवाओं पर ही कमाई का ज्यादातर भाग खर्च हो जाता है। इन केंद्रों पर मिलने वाली 50 से 90 फीसदी कम दरों पर दवाओं ने लोगों की चिंताओं को कम किया है। अगर आंकड़ों पर गौर करें तो इन केन्द्रों के माध्यम से अबतक लोगों के 13 हजार करोड़ रुपये की बचत हुई है। गरीब लोगों को भी सभी आवश्यक दवाएं उपलब्ध हो पा रही हैं, जो काफी महंगी हुआ करती थी।
प्रश्न- सस्ती दवाओं को लेकर लोगों के मन में इनके गुणवत्ता को लेकर चिंताएं होती हैं, तो लोगों को कैसे आश्वस्त करते हैं कि जन औषधि केन्द्रों पर मिलने वाली दवाएं कारगर हैं?
उत्तर- जन औषधि केंद्रों पर मिलने वाली दवाएं जेनरिक होती हैं यानि की दवाओं में प्रयोग होने वाली बेसिक सॉल्ट का प्रयोग कर दवाएं तैयार की जाती हैं। जेनरिक होने के कारण दवाएं सस्ती होती हैं लेकिन उतनी ही कारगर होती हैं, जितनी ब्रांडेड दवाएं होती हैं। लोगों के बीच यह धारणा गलत है कि जेनरिक दवाओं की गुणवत्ता कम होती है। हम दवाओं की गुणवत्ता की जांच दो स्तर पर करते हैं। एक कंपनी के द्वारा और दूसरे एनएबीएल की लेबोरेटरी में जांच कराई जाती है। इस प्रक्रिया में एक हफ्ते का समय लगता है। पूरी जांच के बाद दवाओं को केन्द्रों पर भेजा जाता है।
प्रश्न – देश में 8600 जन औषधि केन्द्र स्थापित किए जा चुके हैं, क्या यह सिर्फ बड़े शहरों और कस्बों में ही खोले जा रहे हैं या ग्रामीण क्षेत्रों में भी इनका लाभ मिल रहा है?
उत्तर- देश में साल 2024 तक 10 हजार से अधिक जन औषधि केंद्र खोले जाने का लक्ष्य रखा गया है। जहां तक ग्रामीण और शहरों में केंद्र खोलने का सवाल है तो इसके लिए नियम निर्धारित किए गए हैं। जहां दवाओं की अधिक बिक्री होने की क्षमता होती है, वहां जन औषधि केंद्र खोले जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी जहां इन केन्द्रों की आवश्यकता है वहां केन्द्र स्थापित किए जा रहे हैं। आने वाले समय में दिल्ली के एम्स में भी एक केन्द्र खोलने की तैयारी की जा रही है।
प्रश्न- इस वित्तीय वर्ष में कितने की दवाएं बेची गईं हैं?
उत्तर – इस वर्ष जन औषधि केंद्रों के जरिए 900 करोड़ रुपये से ज्यादा की दवाएं बिकी हैं। पिछले साल के मुकाबले इस इसमें 35 फीसदी का इजाफा हुआ है। साल 2021 में 36 हजार करोड़ दवाएं बेची गईं हैं। जेनरिक दवाओं के प्रति बढ़ते विश्वास के कारण आने वाले सालों में इन दवाओं की बिक्री से लाभ का प्रतिशत और बढ़ने की संभावना है।
प्रश्न- जन औषधि केन्द्रों पर कितने प्रकार की दवाइयां और चिकित्सीय उपकरण उपलब्ध हैं?
उत्तर- मौजूदा समय में जन औषधि केन्द्रों पर 1600 प्रकार की दवाइयां और 250 से अधिक प्रकार के चिकित्सीय उपकरण उपलब्ध हैं। इस संख्या को जल्द ही बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। इस सूची में कुछ और दवाएं भी शामिल की जाएंगी। आने वाले दिनों में 2 हजार से अधिक प्रकार की दवाइयां मौजूद होंगी। इसके साथ डायबिटीज, ह्रदयरोग, कैंसर जैसी दवाओं को भी शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।
प्रश्न- महिलाओं के लिए क्या कुछ खास है जन औषधि केन्द्रों पर?
उत्तर- महिलाओं के लिए 1 रुपये में सेनेटरी नैपकिन भी इन केंद्रों पर मिल रहे हैं। 21 करोड़ से ज्यादा सेनेटरी नैपकिन की बिक्री ये दिखाती है कि जन औषधि केंद्र कितनी बड़ी संख्या में महिलाओं का जीवन आसान कर रहे हैं। इन सेनेटरी नैपकिन की गुणवत्ता अच्छी है।
प्रश्न- जेनरिक दवाओं के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं?
उत्तर- जेनरिक दवाओं और जन औषधि केंद्रों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए सात मार्च से एक हफ्ते के लिए विशेष अभियान चलाया गया है।‘जेनरिक’ दवाइयों के उपयोग और उसके लाभ के बारे में विभिन्न कार्यक्रम और मंचों के माध्यम से उजागर किया जा रहा है। लोग अब इसके महत्व को समझ रहे हैं।
