राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीद रामकुमार के परिजनों ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि दिल्ली के इंडिया गेट पर स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्म...
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीद रामकुमार के परिजनों ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि
देवावास निवासी वीरचक्र से सम्मानित लांस हवलदार रामकुमार लाम्बा कारगिल युद्ध में आखिरी क्षण तक दुश्मन से लोहा लेते हुए घायल होने के बावजूद भी घुसपैठियों को खदेड़ते रहे थे। रामकुमार लांबा 1986 में सेना में भर्ती हुए थे। इस दौरान वे 1989 में श्रीलंका में तैनात शांति सेना का हिस्सा भी रहे।
शहीद रामकुमार जून 1999 को ऑपरेशन विजय के दौरान 15 हजार फीट की ऊंचाई पर किलाबंद चौकी में हथियारों के जखीरे के साथ मौजूद घुसपैठियों को निकालने का कार्य उन्हें दिया गया था। अपनी टुकड़ी के साथ जब रामकुमार लांबा लक्ष्य के नजदीक पहुंचे तो दुश्मनों ने गोलियां चलानी शुरू कर दी। कंधे व कमर में गोली लगने के बावजूद घायल अवस्था में भी दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए उन्होंने एक हैंड ग्रेनेट फेंककर एक दुश्मन को मार गिराया और दो को घायल कर दिया था। बाद में दुश्मन नजदीक आए तो और दो को उन्होंने मार गिराया। अपने जख्मों से ज्यादा खून बहने के कारण वे देश के लिए शहीद हो गए। उनके अदम्य साहस, शौर्य व सर्वोच्च बलिदान के लिए सरकार ने उन्हें मार्च 2000 को वीर चक्र से सम्मानित किया।
शहीद के पुत्र नागेन्द्र सिंह ने बताया कि स्मारक पर हर सायं एक रिट्रीट समारोह होता है, जब सूर्यास्त से पहले भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के झंडे और राष्ट्रीय ध्वज थोड़ा नीचे किया जाता है। देश के किसी एक शहीद के नेक्स्ट-ऑफ-किन इस रिट्रीट का हिस्सा होते हैं। इस दौरान उन्होंने अमर चक्र पर माल्यार्पण किया।
अमर चक्र संकेंद्रित वृत्तों के समूह में अंतरतम संरचना है जिसमें युद्ध स्मारक शामिल है। इसमें एक शाश्वत ज्वाला है, जिसमें इस साल की शुरुआत में अमर जवान ज्योति की ज्वाला का विलय हुआ था।''देश सदा याद रखेगा आपका बलिदान"
करगिल युद्ध में दिया सर्वोच्च बलिदान
शहीद के पुत्र नागेन्द्र सिंह ने बताया कि स्मारक पर हर सायं एक रिट्रीट समारोह होता है, जब सूर्यास्त से पहले भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के झंडे और राष्ट्रीय ध्वज थोड़ा नीचे किया जाता है। देश के किसी एक शहीद के नेक्स्ट-ऑफ-किन इस रिट्रीट का हिस्सा होते हैं। इस दौरान उन्होंने अमर चक्र पर माल्यार्पण किया।
अमर चक्र संकेंद्रित वृत्तों के समूह में अंतरतम संरचना है जिसमें युद्ध स्मारक शामिल है। इसमें एक शाश्वत ज्वाला है, जिसमें इस साल की शुरुआत में अमर जवान ज्योति की ज्वाला का विलय हुआ था।
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों की स्मृति में आयोजित समारोह में शामिल होना एक अनूठा अनुभव था। हम कामना करते कि ईश्वर आपकी आत्मा को शांति दें और आप जहां भी हों, खुश रहें। हम और ये देश सदा आपके सर्वोच्च बलिदान को याद रखेगा। आप पर हम सबको गर्व है और हम हमेशा आपके आदर्शों पर चलते रहेंगे।
श्रीमती कमला देवी
नागेंद्र सिंह