जातिगत और सांप्रदायिक राजनीति के लिए आज भी बिहार बदनाम है। हाल के विधानसभा चुनाव में नीतीश-लालू के गठबंधन की जीत इसका...
जातिगत और सांप्रदायिक राजनीति के लिए आज भी बिहार बदनाम है। हाल के विधानसभा चुनाव में नीतीश-लालू के गठबंधन की जीत इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। बिहार के गांवों में जाकर देखें तो समाज अभी भी जाति के आधार पर कई समूहों में बंटा हैं। जिस क्षेत्र में जिस जाति की बहुलता होती है उसी का वर्चस्व होता है। हर तरफ 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' का मंजर दिखता है।
लेकिन जब इसी समाज के लोग बिहार से बाहर इलाज के लिए निकलते हैं तो परदेस में अपनी जातीयता भूल एक-दूसरे के मददगार बन जाते हैं। दूसरे राज्य में इनकी एक ही पहचान है और वह है 'बिहारी'। राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के 'सेवाश्रम' में इसी एकता का नमूना देखने को मिलता है। यहाँ इनकी पहचान जाति नहीं, बल्कि बिहार प्रदेश है। बिहार के विभिन्न ज़िलों से दिल्ली में इलाज कराने आए ये सभी लोग सेवाश्रम में एक परिवार की तरह रहते हैं और एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ देते हैं।
सेवाश्रम का दर सबके लिए खुला है और यहाँ आने वाले हर जरुरतमंद को बिना किसी भेदभाव के मदद दी जाती है, चाहे वे किसी भी क्षेत्र या धर्म के क्यों ना हों। कटिहार के मोहम्मद मोहसिन आलम अपनी पत्नी खुर्शिदा का एम्स में इलाज कराने जब दिल्ली आए थे तो ना तो यहां कोई जानने वाला था और ना ही कोई आसरा। सेवाश्रम में बिना किसी भेदभाव के ना केवल उन्हें आसरा और भोजन मिला, बल्कि सुख-दुख में साथ देने वाले अपने ही राज्य व क्षेत्र के कई साथी मिल गए। इनकी आंखों में पप्पू यादव के प्रति वही सम्मान और कृतज्ञता झलकती है जो बिहार से आए अन्य मरीजों में है।
यहीं हमारी मुलाकात सुपौल के दिनेश मंडल से हुई जो कैंसर से पीड़ित अपनी पत्नी का इलाज कराने दिल्ली आए। दिनेश ने बताया कि पहले तो उन्होंने सोंचा कि अपने दमखम पर पत्नी का इलाज करवाएंगे और नांगलोई में अपने संबंधी के यहां रहकर राजीव गांधी कैंसर हॉस्पिटल में पत्नी का इलाज करवाना शुरू किया। कुछ ही दिनों में उनकी सारी जमा पूंजी इलाज में खर्च हो गई और जब सारे दरवाजे बंद हो गए तो पप्पू यादव के सेवाश्रम में बिना किसी सवाल-जवाब के रहने को जगह मिली और मुफ्त में भोजन भी। सेवाश्रम की मदद से एक एनजीओ ने इनकी पत्नी के इलाज का खर्च उठाने का वायदा किया है।
दिनेश कहते हैं कि जो मुसीबत में साथ दे, वही सच्चा परिवार, वही सच्चा साथी है। दिल्ली जैसे अनजाने शहर में सेवाश्रम के रुप में एक बड़ा परिवार मिल गया है और सेवाश्रम के संरक्षक पप्पू यादव इस परिवार के मुखिया हैं, जो हर सदस्य का निजी तौर पर ख्याल रखते हैं। हर सुख-दुख में इनके साथ होते हैं। यही है असली भाईचारा, जो बिहार की राजनीति को एक नई दिशा दे रहा है।




